ग्रेटर फरीदाबाद, सोनीपत और भिवाड़ी जैसे इलाके नमो भारत (RRTS) और एक्सप्रेसवे की वजह से ‘अफोर्डेबल’ होने के साथ-साथ भविष्य के बड़े निवेश केंद्र भी बन रहे हैं. इन इलाकों में प्रॉपर्टी रेट भी अभी मिडिल क्लास की पहुंच में हैं.
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भारतीय रियल एस्टेट बाजार में पिछले कुछ सालों में एक बड़ा बदलाव आया है, जहां डेवलपर्स का पूरा ध्यान अब ‘लग्जरी’ और ‘प्रीमियम’ हाउसिंग पर है। 1.5 करोड़ रुपये से ऊपर के घरों की सेल तेजी से बढ़ी है, जबकि किफायती घरों (40 लाख रुपये से कम) की लॉन्चिंग में भारी गिरावट आई है। जमीन की बढ़ती कीमतों और कंस्ट्रक्शन लागत में इजाफे के कारण बिल्डर्स अब छोटे और सस्ते घर बनाने से कतरा रहे हैं, जिससे मिडिल क्लास के लिए अपना घर खरीदने का सपना एक कठिन दौर से गुजर रहा है।
अपना घर खरीदने का विकल्प हाथ से निकलता देख मध्यम वर्ग जब किराए के घरों की ओर मुड़ता है, तो वहां भी चुनौतियां कम नहीं हैं। पिछले 2-3 सालों में देश के प्रमुख शहरों जैसे बेंगलुरु, गुरुग्राम और मुंबई के मुख्य इलाकों में किराए में 20% से 30% तक का उछाल देखा गया है। कई शहरों में रेंटल यील्ड अपने उच्चतम स्तर पर है, जबकि सैलरी उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही, जिससे मिडिल क्लास की बचत का बड़ा हिस्सा किराए में ही खर्च हो रहा है।
सवाल उठता है कि इस स्थिति में मध्यम वर्ग के पास विकल्प क्या हैं? मौजूदा रुझान बताते हैं कि अब लोग मुख्य शहर से दूर बाहरी इलाकों में घर तलाशने को मजबूर हैं, जहां कीमतें थोड़ी कम हैं। जब तक सरकार की ओर से होम लोन की ब्याज दरों में राहत या डेवलपर्स के लिए किफायती प्रोजेक्ट्स पर टैक्स छूट नहीं दी जाती, तब तक मिडिल क्लास महंगे लोन और किराए के दबाव में ही फंसा रहेगा।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, अब सिर्फ लोकेशन नहीं बल्कि कनेक्टिविटी सबसे बड़ा फैक्टर बन चुका है। RRTS और एक्सप्रेसवे जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने नए इलाकों को उभरते हाउसिंग हब में बदल दिया है। फरीदाबाद, सोनीपत और भिवाड़ी जैसे क्षेत्र किफायती आवास के नए विकल्प बनकर सामने आ रहे हैं, जहां मिडिल क्लास अपने बजट में घर खरीद सकता है।
डेवलपर्स का कहना है कि प्रीमियम सेगमेंट भले सुर्खियों में हो, लेकिन छोटे और मध्यम बजट वाले घरों की मांग भी बनी हुई है। इंटीग्रेटेड टाउनशिप के जरिए कम बजट में बेहतर जीवनशैली देने की कोशिश की जा रही है। सरकारी नीतियां और बेहतर कनेक्टिविटी इस दिशा में मदद कर रही हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाला समय छोटे अपार्टमेंट्स और नियोजित टाउनशिप का है, जो न केवल सेक्टर की स्थिरता बनाए रखेंगे बल्कि रियल एस्टेट की नई दिशा भी तय करेंगे।