
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे काम अंतिम चरण में है और इसका उद्घाटन अप्रैल के पहले हफ्ते में हो सकता है। यह प्रोजेक्ट सिर्फ दो राजधानी के बीच की दूरी के समय को कम करने के बारे में है बल्कि इससे टूरिज्म, रियल एस्टेट और बीच में आने वाले शहरों के विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
एक्सपर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, उद्घाटन समारोह देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में हो सकता है। इसके शुरू होने से दिल्ली और देहरादून के बीच दूरी 235 किमी से घटकर 212 किलोमीटर हो जाएगी। सबसे खास बात यह है कि सफर का समय 4-4 घंटे से घटकर करीब 2.5 घंटे हो सकता है।हाई-स्पीड और एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर के रूप में डिजाइन किया गया ये ये एक्सप्रेसवे दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर बागपत, बड़ौत, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर से होकर गुजरता है। एक्सपर्ट की मदद से समझते हैं कि इस एक्सप्रेस वे के चालू होने से रोजाना सफर करने वालों, वीकेंड में घूमने वालों, इन्वेस्टर्स और रियल एस्टेट सेक्टर में क्या प्रभाव पड़ सकते हैं।
क्यों खास है दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे?
इस प्रोजेक्ट से शुरू होने के बाद से ही यह चर्चा का विषय बना हुआ है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे 210 किलोमीटर लंबा है। कई लेन वाले इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बनाया है। यह यूपी के बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे बड़े शहरों से होते हुए दिल्ली को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से जोड़ता है।
| किस तरह का | एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेस वे |
| लंबाई | लगभग 210 किमी |
| लेन | 6-12 लेन (फेज में) |
| अनुमानित लागत | 12000-13000 करोड़ रुपये |
| प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति | पूरा होने के करीब |
कब शुरू होगा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे?
एक्सपर्ट मान रहे हैं कि एक्सप्रेसवे का काम अंतिम चरण में है और फिनिशिंग का काम जारी है। दरअसल इसे पहले ही शुरू किया जाना था लेकिन अब डेट बढ़ गई है और इसे फेज के हिसाब से शुरू किया जा सकता है। कई जगहों पर इसका ट्रायल हो चुका है, जिससे संकेत मिलता है कि इस पर परिचालन जल्द ही शुरू होने वाला है।
दिल्ली से देहरादून के बीच सफर का समय हो सकता आधा
यह प्रोजेक्ट इसलिए भी खास माना जा रहा क्योंकि इसमें सफर लगभग आधा हो सकता है। मौजूदा समय में दिल्ली से देहरादून जाने में करीब छह घंटे लगते हैं। एक्सपर्ट म मान रहे है कि इस एक्सप्रेस वे पर यह समय घटकर आधा यानी 2।5 घंटे हो सकता है। जाहिर है अगर ऐसा हुआ तो बिजनेस से जुड़ी एक्टिविटीज में काफी सुधार हो सकता है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का लगभग पूरा होना उत्तर भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। सफर के समय में उल्लेखनीय कमी आने से न केवल दिल्ली-एनसीआर और देहरादून के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि यह पूरा कॉरिडोर आर्थिक और रियल एस्टेट गतिविधियों का नया केंद्र बनकर उभरेगा।
गौरव के सिंह, फाउंडर एंड चेयरमैन, वोमेकी ग्रुप
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे की खास बातें
वाहनों को मिलेगी स्पीड: इसे स्मूद और सिग्नल फ्री बनाया गया है और इसका ज्यादातर हिसा फ्लाईओवर पर बनाया गया है जिससे भीड़ से बचने में मदद मिलेगी और वहानों को स्पीड मिलेगी।
वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर: देहरादून में एंट्री से पहले राजा जी नेशनल पार्क पड़ता है, यहां वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है। इसका मतलब है कि यह वाला हिस्सा फ्लाईओवर पर रहेगा और दोनों तरफ से बंद रहेगा।

एडवांस्ड रोड इंफ्रास्ट्रक्चर: इस एक्प्रेसवे पर कई अंडरपास और फ्लाईओवर, सर्विस रोड, एग्जिट पॉइंट्स और रास्ते में फ्यूल स्टेशन और रेस्ट एरियाज बनाए गए हैं। इसके अलावा कई बड़े राजमार्गों को जोड़ता है, जिससे पूरे उत्तरी भारत में आना-जाना आसान हो जाएगा।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे का रियल एस्टेट पर क्या असर पड़ेगा?
बढ़ेगी प्रॉपर्टी की डिमांड: एक्सपर्ट मान रहे हैं कि कहीं भी कनेक्टिविटी बेहतर होने से वहां हाउसिंग और कमर्शियल स्पेस की डिमांड बढ़ती है। इस एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के किनारे बसे इलाकों में पहले से प्रॉपर्टी की मांग बढ़ने लगी हैं।
इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा: इसके शुरू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के क्षेत्र को रियल एस्टेट हॉटस्पॉट के रूप में देखा जा रहा है। खासकर यहां प्लानिंग के तहत विकास हो रहा, फार्महाउस बन रहे और हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो रहा है।
रियल एस्टेट डेवलपर्स के रूप में हम मानते हैं कि इस तरह की हाई-स्पीड, एक्सेस-कंट्रोल्ड कनेक्टिविटी से बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे उभरते शहरों में आवासीय और प्लॉटेड डेवलपमेंट की मांग तेज होगी। बेहतर कनेक्टिविटी के चलते लोग अब बड़े शहरों के बाहर भी रहकर काम करने के विकल्प को अपनाएंगे, जिससे इन क्षेत्रों में एंड-यूजर डिमांड के साथ-साथ निवेश भी बढ़ेगा।
गौरव के सिंह, फाउंडर एंड चेयरमैन, वोमेकी ग्रुप
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे से बढ़ेंगे आर्थिक और रोजगार के अवसर
इस एक्सप्रेसवे से आर्थिक विकास में तेजी आने की पूरी उम्मीद है। इसकी वजह यह है कि कंस्ट्रक्शन होने लॉजिस्टिक्स और टूरिज्म बढ़ने से रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इतना ही नहीं इससे लोकल बिजनेस और हॉस्पिटैलिटी फील्ड को बढ़ावा मिलेगा और ट्रेड और ट्रांसपोर्ट एफिशिएंसी में भी सुधार होगा। जाहिर है बेहतर सड़कें और अच्छी कनेक्टिविटी होने से नए बिजनेस हब्स और इंडस्ट्रियल कामों में तेजी आती है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे के आसपास इन्वेस्ट करें या नहीं, क्या है एक्सपर्ट की राय?
एक्सपर्ट के अनुसार यह प्रोजेक्ट इन्वेस्ट के लिहाज से बेहतर लग रहा है लेकिन बायर्स और इन्वेस्टर्स को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- कई बार प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है और हर इलाके में एक समान विकास नहीं होता है
- कुछ जगहों पर कीमतें पहले से ही ज्यादा हो सकती हैं इसलिए पहले चेक कर लें
- इंफ्रास्ट्रक्चर बनने से अक्सर आसपास की प्रॉपर्टी की कीमतें ज्यादा हो सकती हैं
- इन्वेस्ट से पहले चेक करें कि जमीन की वैध या नहीं, जरूरी मंजूरी मिली हैं या नहीं और डेवलपर का रिकॉर्ड जरूर चेक करें
- ऐसे प्रोजेक्ट्स में तुरंत मुनाफा नहीं मिलता लेकिन लंबे समय का इन्वेस्ट अच्छा साबित होता है
- सही लोकेशन चुनकर इन्वेस्ट करें न कि सिर्फ ऐड देखकर
नोट: इस लेख में NBT रियल एस्टेट के साथ साझा किए गए एक्सपर्ट्स के इनपुट शामिल हैं: